
वित्तीय न्यूनतावाद: कम में बेहतर जीवन
हम ऐसी संस्कृति में रहते हैं जो लगातार कहती है कि हमें और चाहिए। और कपड़े, और गैजेट, और सब्सक्रिप्शन, और सामान। लेकिन क्या हो अगर शांत वित्तीय जीवन की …
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हम ऐसी संस्कृति में रहते हैं जो लगातार कहती है कि हमें और चाहिए। और कपड़े, और गैजेट, और सब्सक्रिप्शन, और सामान। लेकिन क्या हो अगर शांत वित्तीय जीवन की …

“बिल बराबर-बराबर बांट लेते हैं?” – और आपके खाने के बजट का आधा हिस्सा चला गया क्योंकि आपने सिर्फ दाल-चावल मंगाया था और बाकी सबने …

“कितनी EMI में लेंगे, सर/मैडम?” — यह सवाल भारत में रोज करोड़ों बार पूछा जाता है। किश्तों में खरीदारी भारतीय उपभोक्ता संस्कृति में इस कदर …

क्या आप महीने के अंत में सोचते हैं कि पैसा कहाँ गया? क्या आपने स्टेटमेंट देखा और सोचा “मैंने इतना नहीं खर्च किया”? क्या आपने बचत का वादा …